Saturday, November 16, 2013

खंडित - २ : समानता

मेरी कक्षा में चालीस छात्र है - और मेरी बुरी किसमत है कि मुझे ही कक्षा के एकमात्र बंगाली के साथ समूहित किया गया। हर साल के तरह, इस साल भी हमे एक वर्ग परियोजना पर काम करना था ।  मुझे इस विषय में कुछ विशेष रूचि नहीं थी परन्तु परियोजना करना मुझे अच्छा लगता था क्योंकि मुझे हमेशा अच्छे सहयोगी मिले थे।  सिवाए इस बार।

"देख बंगाली, मैं तेरे साथ काम नहीं कर सकता हूँ! तुम बहुत ही रहसीन हो और मैं केवल मनोरंजक सहयोगी के साथ काम कर सकता हूँ।  शिक्षिकाजी से बात करके दल बदल देते है। "

"कितनी बार एक ही बात बताना पड़ेगा - शिक्षिका ने कहाँ है कि दल नहीं बदले जायेंगे? अब या तो हम साथ में काम करेंगे या साथ में दूबेंगे।  तो काम करे?"

मुझे कभी समझ में नहीं आएगा कि यह देश कैसे चलता है। हम एक लोग है ही नहीं - कश्मीरी और मद्रासी, पंजाबी और बंगाली - अलग लोग ही नहीं, अलग राष्ट्र-समान है।  अब बात है कि दिल्ली ऐसा शहर है जिसमें सब लोग रहते है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम सब समान हुए। इसके बावजूद, बंगाली सही बोल रहा था - या तो हम साथ काम करेंगे या साथ मरेंगे!

"सुन, दो घंटे से काम ही कर रहे है, थोडा चाय पीने चलते है - बेहतर काम कर पाएंगे। "

सच यही है कि यह बंगाली बीस घंटे काम कर सकता है बिना हिले परन्तु वह चाय पीने तैयार इसलिए हुआ क्योंकि उसे बहस नहीं करना था।

***

"तुम्हे क्यों लगता है कि मेरे बंगाली होने से तुम मेरे साथ काम नहीं कर सकते हो?"

तो अंततः उसने पूछ ही लिया। मुझे बंगाली क्यों नहीं पसन्द है?  बात नहीं कि मैं उनसे कोई निजी दुश्मनी रखता हूँ - सच बताऊँ तो मैं बहुत कम बंगालियों को जानता हूँ।  परन्तु वह अजीब लोग है - सुबह सुबह उठकर ज़ोर से अजीब गाने चलाते है, अपने आपको दो नाम देते है और… दिन भर मछली खाते रहते है!

"तुम लोग बस बहुत ही अजीब हो - हम पंजाबियों से बिल्कुल अलग। मुझे समझ में नहीं आता है कि हम दोनों एक ही देश के कैसे हो सकते है। "

"पर यह बात मैं तुम्हारे बारे में भी बोल सकता हूँ। "

"हाँ तो बोल दो! वैसे भी हम इस देश के थे ही कब…"

मुझे पता नहीं मैंने ऐसे क्यों कहाँ - मैं जीवन भर भारत में ही रहा हूँ और मुझे आगे यहीं रहना है। परन्तु नानाजी मुझे बताते रहते है…

"तुम पाकिस्तान से आये थे क्या?"

मुझे पता भी नहीं चला कि मैंने उस पर कब हाथ उठाया - उसने जब कहाँ कि मैं पाकिस्तान से हूँ, तो मुझे बहुत अधिक गुस्सा आया।

"मुझे माफ़ करो, मैं तुम्हे नहीं मारना चाहता था।  परन्तु आगे कभी मत बोलना कि मैं पाकिस्तान से हूँ - जब भारत का विभाजन हुआ तो मेरे पूरे परिवार को दिल्ली आना पड़ा … नानाजी कहते है कि आधा परिवार भी नहीं पहुँच पाया, सब बीच में.… पर तुम बंगालियों को क्या पता इसके बारे में?"

"मैं समझ सकता हूँ, लेकिन तुम्हे यह बात जानना चाहिए कि विभाजन के समय केवल पंजाब ही नहीं, बंगाल का भी विभाजन हुआ था।  मेरे परिवार को भी ढाका से दिल्ली आना पड़ा। "

मैं शायद कक्षा में ध्यान नहीं देता हूँ पर मुझे पता है कि विभाजन के समय क्या हुआ था।  परन्तु मैंने हमेशा इसे पंजाब के दायरे से ही देखा है - शायद इसलिए क्योंकि मेरे अपने मरे थे। बंगाल बहुत ही दूर था... या फिर.…

मैंने उसे ज़मीन से उठाने के लिए हाथ आगे किया।

"एक पंजाबी एक बंगाली को उठने में मदद करना चाहता है? सोच लो। "

तीन महीने से हम उस परियोजना पर काम कर रहे थे और तीन महीने में मुझे पहली बार उसके किसी भी बात पर हंसी आयी।

"हाँ बंगाली, एक पंजाबी तुझे उठने में मदद करना चाहता है - हम दोनो पहले भी गिर चुके है।  शायद इतने भी अलग नहीं हैं। "

(समाप्त)

1 comment:

ypk said...

nice one bon.. simple but sweet!!