Friday, January 2, 2015

क्या होगा कश्मीर में?

झारखण्ड में चुनाव समाप्त हुए और नए मुख्य मंत्री ने शपथ भी ली, परन्तु कश्मीर में सरकार बनाने का काम अभी भी जारी है। मुश्किल यह है कि चुनावी परिणाम निर्णायक तो थे ही परन्तु विभाजित भी : कश्मीर ने PDP को मतदान दी, जम्मू ने BJP को एवं लदाख ने कांग्रेस को - ऐसा है कि कोई भी सरकार हर एक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती है।  ऊपर-ऊपर से तो PDP -कांग्रेस का सरकार सबसे सरल तो लगता है लेकिन यह बात इतिहास को अनदेखा करता है : कुछ ही साल पहले ही कांग्रेस ने PDP का सरकार तोड़ा था मुख्य मंत्री पद के लिए। अतः ऐसा गटबंधन अवश्य PDP के लिए मुश्किल होगा। 

सबसे चौकाने वाली बात तो यह है कि BJP भी सरकार बनाने कि कोशिश कर रही है। और क्योँ नहीं, आखिर उनके पास जम्मू के लोगों का मतदान है। परन्तु PDP -BJP सरकार यदि हो भी तो दोनों दलों के लिए मुश्किल होगा। PDP जन्म से ही अलगाववादियों सहानुभूति रखती है और BJP बिल्कुल उल्टा, धारा ३७० को रद्द करना चाहती है। ऐसे दो दल यदि सरकार बनाये तो यह खुद के पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसे होगा। ख़ास कर BJP के लिए यह देश-भर में मुश्किल पैदा करेगी क्योंकि केवल केंद्रीय सरकार ही धारा ३७० को रद्द कर सकती है - श्रीनगर में गठबंधन चलाते यह करना असंभव होगा और BJP  के समर्थकों के लिए यह विश्वासघात होगा। 

परन्तु, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के लिए शायद यह बात बाद के लिए रखा जा सकता है। उन्हें पता है की मई में उनका बहुमत आर्थिक विकास के वचन पर था और विपक्ष दल ने जिस तरह से राज्य सभा में उनका यह योजना रोक दिया है, इससे समझ में आता है की BJP को राज्य सभा में भी बहुमत जीतना पड़ेगा, जिसके लिए PDP जैसे दलों से व्यापर करना अवश्य है। बिना राज्य सभा में बहुमत के धरा ३७० को रद्द करना असंभव होगा तथा आर्थिक विकास के लिए ज़रूरी सुधार भी। अतः यदि मोदी को २०१९ में एक और सकरार बनाना हो, तो अभी के लिए धारा ३७० जैसे मुद्दों को अनदेखा करना पड़ेगा। राजनीति में बहुत बार एक कदम पीछे जाके दो कदम आगे बढ़ना पड़ता है। 

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